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मजदूरों के पलायन पर सुप्रीम कोर्ट में बोली सरकार, 22 लाख 88 हजार लोगों को दिया जा रहा खाना

उच्चतम न्यायालय Supreme court  में मंगलवार को फिर प्रवासी मजदूरों को लेकर दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई हुई। वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने अपनी याचिका में कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन Lockdown के मद्देनजर मजदूरों के लिए तुरंत खाना, आश्रय मुहैया कराने के निर्देश देने के लिए कहा है। जिसपर केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मजदूरों के अंतरराज्यीय पलायन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा हुआ है।

तुषार ने शीर्ष अदालत को बताया, ‘हम लोगों में मौजूद भ्रम को दूर करने के लिए परामर्श प्रदान करने पर विचार कर रहे हैं। 22 लाख 88 हजार से ज्यादा लोगों को खाना दिया जा रहा है। यह सभी जरुरतमंद, प्रवासी और दिहाड़ी मजदूरी करने वाले लोग हैं। उन्हें आश्रय स्थल में रखा गया है।’

न्यायालय ने सुनवाई के दौरान केंद्र से कहा कि वह फर्जी खबरों के माध्यम से फैलाई जा रही दहशत का मुकाबला करने के लिए कोरोना वायरस महामारी को लेकर रीयल टाइम जानकारी देने के लिए 24 घंटे के अंदर एक पोर्टल स्थापित करे। अदालत ने कहा कि लोगों की जान वायरस से ज्यादा जान भ्रम ले लेगा।

अदालत ने केंद्र से कहा कि देश के विभिन्न आश्रय स्थलों में रह रहे प्रवासियों को समझाने के लिए सभी धर्मों के सामुदायिक नेताओं और प्रशिक्षित परामर्शदाताओं की मदद ले। अदालत ने केंद्र को पलायन रोकने के लिए कहा और उनके लिए खाना, आश्रय, पोषण और चिकित्सा जरुरतों को सुनिश्चित करने के लिए कहा।

केंद्र ने शीर्ष अदालत से कहा कि प्रवासियों पर पानी और रसायनों का छिड़काव करने का सुझाव वैज्ञानिक रूप से काम नहीं करता है और यह सही तरीका नहीं है। अदालत ने प्रवासियों के मुद्दे को उठाने से उच्च न्यायालयों को प्रतिबंधित करने से इनकार करते हुए कहा कि वे इस मुद्दे की ज्यादा बारीकी से निगरानी कर सकते हैं।

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